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शुक्रवार, जनवरी 19, 2018

वही वो मुंआ बवाल


कह दी बात
खुल के
बात अपने 
दिल की
तो हो गया बवाल.....
तलाशते हो
यहां - वहां
रोज बाते चटपटी 
मुहब्बत की 
आँखें ने...जो 
कही.. तो हुआ 
वही.....जिसका 
था.....अंदेशा 
काफी भारी.....हुआ 
बवाल.....
लिहाज कर गए 
बड़ों का
झुका कर....आँख
तो हो गया...वही
घिसा-पिटा सा
बवाल.....
किया सवाल
डालकर आँखें
आखों में
कहलाई मैं
बवाली.....सोचा हमने
कि होगा कहा धोखे से
बावली की जगह
बवाली....पूछ लिया
तो हो गया....वही
वो मुंआ बवाल

4 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते
    आपकी लिखी रचना सोमवार २२जनवरी २०१८ के विशेषांक के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  2. लाज़वाब रचना
    बहुत बहुत बधाई

    उत्तर देंहटाएं