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रविवार, अगस्त 14, 2016

तरोताजा करती है रैकी..एक अध्ययन

तरोताजा करती है रैकी आध्यात्मिक चिकित्सा पद्धति

जापान की परंपरागत 'जिकिडेन रैकी आध्यात्मिक चिकित्सा पद्धति' डायबटीज, गठिया, स्लिप डिस्क और बहरापन जैसी अनेक बीमारियों के साथ-साथ लाइलाज माने-जाने वाली अनेक बीमारियों में भी बहुत कारगर पाई गई है, साथ ही यह मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक बीमारियों में भी बहुत असरकारक मानी जाती है। दरअसल, यह चिकित्सा पद्धति बीमार तन-मन के साथ तंदुरुस्ती के लिए भी बहुत उपयोगी है 
और यह उन्हें और भी तरोताजा करती है।

भारत यात्रा पर आए विश्वप्रसिद्ध जिकीडेन रैकी मास्टर फ्रेंक अरजावा पीटर ने राजधानी में आयोजित एक व्याख्यान में यह जानकारी देते हुए बताया कि दरअसल यह चिकित्सा पद्धति केवल बीमार तन-मन को ही नहीं, बल्कि तंदुरुस्त व्यक्ति को और तरोताजा करती है, 
प्रफुल्लित करती है।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया को इस स्वास्थ्य पद्धति को दोबारा अपनाए जाने की बहुत जरूरत है। यह न केवल सस्ती रहती है बल्कि इसका असर भी रोगी पर बहुत जल्द नजर आता है तथा रैकी तन-मन दोनों की बीमारियों के इलाज के लिए बहुत कारगर पाई गई है।

रैकी मास्टर ने बताया कि जिकिडेन रैकी दरअसल जापानी चिकित्सा की एक बहुत प्राचीन आध्यात्मिक चिकित्सा पद्धति है 
जिसका बड़ी तादाद में लोग प्रयोग करते हैं। 

उन्होंने कहा कि इसे वे तथा उनके सहयोगी दोबारा से व्यापक पैमाने पर अपनाए जाने की महत्ता के अभियान में जुटे हैं। इस अवसर पर उन्होंने इस विधा का वहां मौजूद कुछ लोगों पर प्रयोग करके भी दिखाया। इस विधा को प्रयोग करने वाले अनेक लोगों ने भी 
इस बारे में अपने अनुभव भी साझे किए।

उन्होंने कहा कि यह तकनीक रक्तचाप, डिप्रेशन, भय जैसी मानसिक परेशानियों में भी बहुत फायदा देती है। भारत में इस पद्धति के पहले जिकिडेन रैकी मास्टर अमित सिंह भी इस मौके पर मौजूद थे।

सिंह के अनुसार वे लोग भारत में इसको लोगों तक पहुंचाने का एक अभियान चला रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे लाभान्वित हो सकें, क्योंकि यह न केवल कारगर है बल्कि आम आदमी की पहुंच में है और इसके इलाज का भी जल्द असर देखने को मिलता है।

वे लोग भारत में इसको लोगों तक पहुंचाने का एक अभियान चला रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे लाभान्वित हो सकें, क्योंकि यह न केवल कारगर है बल्कि आम आदमी की पहुंच में है और इसके इलाज का भी जल्द असर देखने को मिलता है।

उन्होंने बताया कि इस पद्धति की खासियत यह है कि इसके जरिए बीमार या उपचार करने वाला तो लाभान्वित होता ही है बल्कि यह एक ऐसी अनूठी पद्धति है जिससे उपचार करने वाले रैकी मास्टर में भी प्राणिक ऊर्जा का संचार होता है, साथ ही इसे अन्य चिकित्सा पद्धतियों के साथ-साथ कराया जा सकता है।

रैकी से बीमारियों के इलाज के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर के टॉक्सीन्स नष्ट होते हैं तथा आप स्वयं को तरोताजा महसूस करते हैं।

उन्होंने बताया कि अपनी बीमारियों पर प्रचलित चिकित्सा पद्धतियों से इलाज का कोई असर नहीं होने से निराश होकर उन्होंने इस चिकित्सा पद्धति का सहारा लिया था और स्वस्थ होने पर वे इसे अब जनसाधारण तक पहुंचाने के अभियान से जुड़े हैं।

रैकी मास्टर फ्रेंक दुनियाभर में लोगों को इस विधा को सिखा रहे हैं तथा इस बारे में उन्होंने अनेक पुस्तकें भी लिखी हैं।
-एक अध्ययन

Reiki Hand Positions for Self-Treatment


शुक्रवार, अगस्त 12, 2016

शुरुआती कदम...विभिन्न पुस्तकों से संकलित

कठिनाईया

जब तक आप अपनी समस्याओं एंव कठिनाईयों की वजह दूसरों को मानते है, तब तक आप अपनी समस्याओं एंव कठिनाईयों को मिटा नहीं सकते। क्योंकि अपनी समस्याओं एंव कठिनाईयों की वजह आप स्वयं हैं।

असंभव

इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं। हम वो सब कुछ कर सकते है, जो हम सोच सकते है और हम वो सब सोच सकते है, 
जो आज तक हमने नहीं सोचा।

हार ना मानना

बीच रास्ते से लौटने का कोई फायदा नहीं क्योंकि लौटने पर आपको उतनी ही दूरी तय करनी पड़ेगी, जितनी दूरी तय करने पर आप लक्ष्य तक पहुँच सकते है। इसलिए लक्ष्य की ओर बढ़ें। अर्थ- हार व जीत का
सफलता हमारा परिचय दुनिया को करवाती है और असफलता हमें दुनिया का सहीं परिचय करवाती है।

सच्चा आत्मविश्वास

अगर किसी चीज़ को आप सच्चे दिल से चाहो तो पूरी कायनात 
उसे तुमसे मिलाने में लग जाती हैं।

सच्ची महानता

सच्ची महानता कभी न गिरने में नहीं बल्कि 
हर बार गिरकर फिर से उठ जाने में हैं।

गलतियां

अगर आप समय पर अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करते है तो आप एक और गलती कर बैठते है। आप अपनी गलतियों से तभी सीख सकते है जब आप अपनी गलतियों को स्वीकार करते है।

चिन्ता

अगर आप उन बातों एंव परिस्थितियों की वजह से चिंतित हो जाते है, जो आपके नियंत्रण में नहीं हैं तो इसका परिणाम समय की बर्बादी एवं भविष्य में पछतावा है।

शक्ति

ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हम हैं जो अपनी आँखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है।

मेहनत

हम चाहें तो अपने आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर अपना भाग्य खुद लिख सकते है और अगर हमको अपना भाग्य लिखना नहीं आता तो परिस्थितियां व समय हमारा भाग्य लिख ही देंगी।
सपने

सच कहे ताे सपने वो नहीं है जो हम नींद में देखते है, 
सपने ताे वो है जो हमको नींद हीं न आने दें।

समय

आप यह नहीं कह सकते कि आपके पास समय नहीं है क्योंकि आपको भी दिन में उतना ही समय (२४ घंटे) मिलता है जितना समय महान एंव सफल लोगों को मिलता है। समय सभी काे एक समान ही मिलता हैं।

विश्वास

विश्वास में वो शक्ति है जिससे उजड़ी हुई दुनिया में प्रकाश लाया जा सकता है। विश्वास पत्थर को भगवान बना सकता है और अविश्वास भगवान के बनाए इंसान को भी पत्थर दिल बना सकता हैं। विश्वास की नीव पर टिके है सारे रिश्तें।

सफलता

दूर से हमें आगे के सभी रास्ते बंद नजर आते हैं क्योंकि सफलता के रास्ते हमारे लिए तभी खुलते हैं जब हम उसके बिल्कुल करीब पहुँच जाते हैं।

सोच

बारिश के दौरान सारे पक्षी आश्रय की तलाश करते है लेकिन बाज़ बादलों के ऊपर उडकर बारिश को ही नज़रअन्दाज कर देते है। समस्याए समान है, लेकिन आपका नजरिया इनमें फर्क पैदा करती है। इसलिए अपने सोचने के नजरिये में बदलाव करें।

प्रसन्नता

यहा पहले से निर्मित कोई चीज नहीं है... 
ये आप ही के कर्मों से आती है .... आपके कर्मं ही निमित्त बनते हैं।

निमित्त भाव

आप सिर्फ निमित्त मात्र हैं इस संसार में। यह संसार एक रंगमंच हैं - सभी मनुष्य आत्मायें अपना-अपना Part Play कर रही हैं। जाे आत्मा अपना Part निमित्त भाव से Play कर रही है, ओ आनंद में हैं।
याद रखेंः - जीवन में सच्चा आनंद और शांति ताे सिर्फ व सिर्फ ईश्वरीय ध्यान `या` परमात्म याद (Godly Meditation)  में ही हैं। चाहे अरबाे-खरबाे (Billions - trillions) इकट्ठा कर लाे फिर भी सच्चा आनंद और शांति कभी ना मिलेगी।

-विभिन्न पुस्तकों से संकलित
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अगले अंक में

तरोताजा करती है रैकी आध्यात्मिक चिकित्सा पद्धति