रैकी आध्यात्मिक चिकित्सा पद्धति
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बसन्त
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बसन्त
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शुक्रवार, जनवरी 26, 2018
बावरी कोयलिया....
मद भरी मादक
सुगन्ध से
आम्र मंजरी की
पथ-पथ में....
कूक कूक कर
इतराती फिरे
बावरी
कोयलिया....
है जाती
जहाँ तक नजर
लगे मनोहारी
सृष्टि सकल
छा गया
उल्हास....चारों
दिशाओं में
री सखि देखो
बसन्त आ गया
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